राजस्थान की पहचान उसके शाही और सात्विक खान-पान से है। मारवाड़ के मरुस्थलीय अंचल में दाल बाटी चूरमा सिर्फ एक भोजन नहीं, बल्कि यहाँ की अतिथि सत्कार संस्कृति की आत्मा है। बाड़मेर-सिणधरी क्षेत्र से गुजरने वाले हर यात्री की यही चाहत होती है कि उसे हाईवे पर भी घर जैसा शुद्ध देसी घी में बना दाल बाटी चूरमा मिले।
होटल महादेव की दाल बाटी की ख़ासियत
होटल महादेव (RJ SH 28, सिणधरी) में दाल बाटी पहले से बनाकर नहीं रखी जाती। जब आप ऑर्डर देते हैं, तो बाटी को पारंपरिक कंडे व तंदूर में धीमी आंच पर सेका जाता है ताकि वह अंदर से मुलायम और बाहर से कुरकुरी बने। इसके बाद गरमा-गरम बाटी को शुद्ध देसी घी में भरपूर डुबोया जाता है।
पारंपरिक थाली के मुख्य घटक:
- शुद्ध देसी घी में डूबी पारंपरिक दरदरे आटे की गेहूं बाटी
- पंचमेल दाल (चना, मूंग, उड़द, तुअर व मसूर) जीरा-हींग तड़के के साथ
- काजू, बादाम और देसी खांड से तैयार बारीक दानेदार चूरमा
- मारवाड़ी तीखी लहसुन-लाल मिर्च चटनी और पुदीना मसाला छाछ
काठियावाड़ी और गुजराती स्वाद का संगम
क्योंकि RJ SH 28 मार्ग राजस्थान को गुजरात (सांचोर, थराद, डीसा) से जोड़ता है, इसलिए हमारे मेनू में काठियावाड़ी सेव टमाटर, लसणिया बटाटा और काठियावाड़ी तड़का दाल का विशेष स्थान है। गाढ़ी खट्टी-मीठी ग्रेवी और तीखी सेव का यह संगम हाईवे मुसाफिरों और ट्रक ऑपरेटर्स के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है।
15 से 20 मिनट ताज़ा तैयारी का नियम
हम स्वास्थ्य और सात्विकता से कभी समझौता नहीं करते। सभी सब्जियां, पनीर और दालें हर ऑर्डर पर ताज़ी बनाई जाती हैं। इसलिए हम अपने ग्राहकों से 15-20 मिनट का समय लेते हैं ताकि परोसा गया हर निवाला गरमा-गरम और सेहतमंद हो।